आतंकी को मृत्युदंड की सजा।

 

राष्ट्र के विरुद्ध जेहाद,  हैदराबाद व मुंबई विस्फोटकांड के अलावा कई संगीन  जुर्म के आरोपी लस्करे-ऐ- तैइबा के आतंकी अब्दुल नईम उर्फ शेख समीर को शनिवार बनगांव अदालत  ने सजा-ऐ -मौत का दंड दिये जाने की घोषणा किया। फास्ट ट्रेक फास्ट कोर्ट के एडिशनल डीस्ट्रीक सेसेन जज विनय कुमार पाठक ने उसे यह सजा सुनाया।

इजलास से बाहर निकला  शेख समीर जरा सा भी बिचलीत नही था। वह फरार्टेदार अंग्रेजी में जबाव देने हुए अपने को बेकसुर बताया।  उसका आरोप है कि सरकारी वकील ने उसके खिलाफ जिन बिस्फोटकांडों से जुड़े रहने का आरोप लगाया है, वह पूरी तरह से बेबुनीयाद  है। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ वह उपरी अदालत में जायेगा।

बता दे कि 2007 बनगांव अंतराष्ट्रीय पेट्रापोल सीमा से घुसपैठ के आरोप में बीएसएफ ने शेख समीर के संग उसके चार साथियों को गिरफ्तार किया था। कानूनी कार्यवाई के लिए उन चारों को बनगांव थाना के हवाले किया गया, जांच आरंभ होने पर परत दर परत उनकी अपराध सामने आने लगी। उनका गंभीर अपराध और जांच का दायरा बिस्तृत होने के कारण मामला सीआईडी से सुपूर्द कर दिया गया।   सीआईडी ने उन चारों के खिलाफ बनगांव कोर्ट में चार्जसीट पेश किया। सुनवाई चलने के दौरान ट्रांजिट रीमांड पर मुंबई ले जाते समय महाराष्ट्र पुलिस के आंख में धुल झोंक कर चलती गाड़ी से कूद कर वह भाग निकला था। 2017 में एनआईए ने उसे दिल्ली के पटियाल से गिरफ्तार किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या का षडयंत्र रचने के आरोप में वह अभियुक्त तीहाड़ जेल में कैद था। इधर, उसके फरार रहने के दौरान बनगांव अदालत ने उसके साथी शेख अब्दुल्ला, मुजफ्फर अहमद और मुहम्द यूनूस को मौत की सजा सुनाई।

सरकारी वकील समीर दास ने शेख समीर के दावे को झूठा बताते हुए कहा कि जांच के दौरान उसकी ब्रेन मैपिंग और नारको टेस्ट किया गया था, उस टेस्ट के में वह अपने कई जुर्म को कबूल लिया था, जो आगे की जांच में तथ्यों के आधार पर प्रमाणीत भी हुई है। राष्ट्रहीत में उसे सार्वजनीक करना गलत होगा। सीआईडी को उसके कब्जा से फर्जी पासपोर्ट, वोटर कार्ड और कई फर्जी दस्तवेज मिला था, उसके कब्जा से तरल बिस्फोटक नाइट्रो ग्लीसरीन भी बरामद हुई थी। कोलकाता के मदन मोहन बर्मन स्ट्रीट के एक किराये के मकान में फर्जी नाम से वह रह रहा था। अदालत ने इसदिन उसके चार फर्जी नामों को गिनवाया है।